Please wait !

Jaya Kishori Ji

बहुत ही कम उम्र में जया किशोरी जी ने दुनिया को ये दिखा दिया की भगवान कहीं न कहीं हमारे साथ हैं, जया किशोरी जी के घर में माता जी पिता जी, दादा जी, दादी जी, नाना-नानी जी हैं और उनके आशीर्वाद से आज जया पूरे भारत में भगवान का नाम, भगवान की आस्था बाँट रही हैं |

पूज्य जया जी की उम्र बहुत ही कम हैं| जिस उम्र में किताब के पन्नो को पलटना चाहिए विद्यार्थी जीवन जीना चाहिए उस उम्र में जया ने भगवत गीता जी और अन्य नानी बाई का मायरो. नरसी का भात, जैसी कथाएँ दुनिया को सुनाई हैं|

 

जया किशोरी की कथाजया किशोरी के भजन सुनने के लिए लाखों की मात्रा में भक्तगण आते हैं |

 

जया किशोरी का जन्म राजस्थान के सुजानगढ़ गाँव में हुआ है वे एक गौड़ ब्रह्माण्ड परिवार में जन्मी है, जन्म के उपरांत ही बताया गया था की उनका जन्म चन्द्रवंश में हुआ है जो की बहुत ही किस्मत वालों को ऐसा अवसर प्राप्त होता है|

 

जया ने कोलकाता के स्कूल महादेवी बिडला वर्ल्ड एकेडमी से स्कूली पढाई पूरी की है, जया किशोरी के घर में शुरू से ही भक्ति का माहौल रहा है|

 

जब वे केवल 6 साल की थी तब से भगवान कृष्ण के लिए जन्माष्टमी पर विशेष पूजा करती थी और 6 साल की उम्र में ही भगवान के प्रति उनका लगाव इतना था की वे तभी से श्रीकृष्ण जी को अपना भाई बंधू मित्र सबकुछ मानने लगी|

जया ने 9 साल की उम्र में संस्कृत में लिंगाष्ठ्कम, शिव तांडव स्त्रोतम, रामाष्ठ्कम आदि कई स्त्रोतों को गाना शुरू किया और आज 2018 में भी उनकी मधुर वाणी सुनने को मिल रही है | जब 10 साल की थी जया ने सुन्दरकाण्ड गाकर लाखों भक्तों के मन में दिलों में जगह बना ली | जया जी की कथा के दौरान जो भी धन इकट्ठा होता है उसे नारायण सेवा ट्रस्ट में दे दिया जाता है जो की नारायण सेवा के अस्पताल में अपंग व्यक्तियों बच्चो आदि के काम आता है |

नारायण सेवा गरीब बच्चों के लिए स्कूल और खाने पिने का ध्यान रखता है, नारायण सेवा में गरीब महिलाओं की शादियाँ होती है| नारायण सेवा की कई गौशालाएं भी चलाई जाती है|

जया किशोरी का जीवन बहुत ही सादा है| जिस उम्र में लड़कियां शौक श्रृंगार घूमना फिरना नाचना गाना पसंद करतीं है उस उम्र में जया जी भगवान का रास्ता पकड़ा और उसी मार्ग में अपना जीवन जीना सही समझा |

जया किशोरी जी को सादा रहना सादे कपडे पहनने पसंद है| जया किशोरी का खाटू श्याम जी में बहुत बड़ा विशवास है जिसकी वजह से वो हर साल राजस्थान में खाटूश्यामजी के मंदिर जरुर जाती है | जया किशोरी जी जब भी खाटूश्यामजी जाती हैं तो पंचायती धर्मशाला में रूकती है और दो तिन दिन जब तक रूकती है तब तक हर शाम भजन गीत आदि से भक्ति का माहौल बनती हैं |

जया जी बहुत बड़ी भजन गायिका है| जया बचपन में क्लासिकल नृत्य श्रीकृष्ण जी के लिए किया करती थीं| उनके परिवार की परवरिश के कर्ण उनका रुझान श्रीकृष्ण की तरफ हुआ और श्री कृष्ण जी की कृपा से आज जया किशोरी को पूरी दुनिया में कथावाचक के नाम से जाना जाता है|

Related Articles