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Educational Help To Miss. Kalyani

कहते है कि अगर किसी व्यक्ति  में इंसानियत जिन्दी हो तो वह भगवान से कम नहीं लगता... और शैतान बन जाये उसे क्या पत्नी... क्या बेटी... क्या माँ का रिश्ता याद रहें ?

एक दुःखद कहानी कल्याणी नाम की बेटी की... जिसकी पीड़ा... इतनी कष्टकारी है कि आज पिता के जिन्दे होते हुए भी... वो दर दर मदद की गुहार लगा रही है... क्या गुजर रही होगी उस बेटी पर... ?

वाक्या यूँ है कि विशाखापट्नम निवासी 15 साल की कल्याणी के पिता ने प्रेम में अंधे होकर किसी अन्य औरत से चोरी छिपे विवाह रचा लिया। महीनों तक कल्याणी और उसकी पत्नी विजयलक्ष्मी का हाल पूछना भी भूल गया... बेहया पिता ........

जैसे तैसे विजयलक्ष्मी ने अपने पति से मिल बैठ कर परिवार में सुलह करने की कोशिश की तो उल्टा ही हुआ.......

कल्याणी के बद्चलन पिता विजयलक्ष्मी के साथ रोज-रोज झगड़ा करने लगा.... पत्नी को प्रताड़ित करने लगा।  घर के माहौल को लड़ाई-झगड़ा और गालियों से दूषित करके सबका जीना मुश्किल कर दिया इंसान रूपी पिता ने शैतान बनकर ऐसी दुःखद जिन्दगी  में माँ और बेटी कल्याणी ने घर से निकलना ही अच्छा समझा पिता को छोड़कर दोनों अपने ननिहाल को चली गयी। ननिहाल में पहुंचने पर भी ईश्वर को क्या मंजूर था जो कि माँ विजयलक्ष्मी एक दुर्घटना की शिकार हो गयी और उसके पांवों हड्डी टूट गयी। एक दुःखी माँ को बिस्तर पकड़ जाना .... कितना दुःखदायी होता है जिसका हम केवल अंदाजा ही लगा सकते है। दुःख के महीने धीरे-धीरे वर्षों में बढ़ते गए फिर भी सुख आना अभी बाकी है ...

दुःखी माँ अब अपनों पर भार न रहकर पास ही के किसी टेलर की दुकान पर हाथ से काज बटन लगाने का काम करने लगी है। बेटी कल्याणी, माँ और खुद के गमगीन दिनों को मेटने के लिए... कड़ी पढ़ाई के लिए प्रयास कर रही है लेकिन फीस भरने को तरस रही है।

साइंस तृतीय वर्ष की छात्रा कल्याणी आगे पढ़ना चाहती है लेकिन अभावों.... घरेलू हिंसा के चलते.... डगर से डगमगाने लगी तो एक दिन SPD अध्यक्ष श्री प्रशान्त अग्रवाल जी टी.वी. प्रोग्राम से आशा जगी और वो उदयपुर पहुंची गई... उसने श्री भैया जी से भेंट कर अपनी दुःख भरी कहानी बताई  श्री प्रशान्त जी ने माँ और बेटी की मदद करने के लिए अपनी सहमति देते हुए कहा कि आप जैसी बेटियों की मदद के लिए सेवा परमो धर्मों ट्रस्ट सदैव तैयार है।

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