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Success Mantras

सफलता का मंत्र
 

सही समय पर सही फैसला भी कला
अगर आप अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं तो आपको तत्काल निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
रोजमर्रा जिंदगी में ऐसे बहुत से क्षण भी आते हैं  जब हमें तत्काल फैसला करना होता है। ऐसे में फैसले के सही या गलत होने से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है फैसले का लिया जाना। अगर आप सही समय पर फैसला नहीं कर पाते हैं तो कई अवसर खो बैठते हैं। इसमें दो तरह की संभावनाएं रहती हैं। एक तो यह है कि सही फैसला लिए जाने पर आपको फायदा होगा और दूसरा, गलत फैसले  पर सीख मिलेगी। आपनी जिंदगी को बेहतर ढंग से जीने के लिए फैसले लेने की कला में आपको माहिर बनना होगा। इसके लिए कुछ प्रयास किए जा सकते हैं -
 

न उलझें खुद में
बहुत से लोग किसी भी फैसले को लेने से पहले उसके परिणामों और उनसे जुड़ी संभावनाओं के एक - एक पहलू पर इतना सोचने लगते हैं कि वे एक चक्र में उलझ कर ही रह जाते हैं। किसी भी चीज का ज्यादा विश्लेषण कर एक छोटा सा फैसला भी खुद नहीं कर पाते । एक तो उनके दिमाग में द्वंद्व चलता रहता है और दूसरा , उनके अपने आप में ही उलझे रहने का फायदा उनके प्रतिद्वंद्वी उठा ले जाते हैं। तमाम विकल्पों पर सोच - सोचकर कर अपनी ऊर्जा गंवा चुके  ये लोग प्रतिद्वंद्वियों का छोटा सा दाव  भी विफल नहीं कर पाते । आपको कोई भी फैसला लेते समय सोच विचार जरुर करना चाहिए, पर इसमें ज्यादा उलझने की बजाय अपने फैसले को सही साबित करने के लिए कड़ी मेहनत में जुट जाना चाहिए।

 

तय करें डेडलाइन
बेशक महत्वपूर्ण फैसले लेने में उनके फायदे और नुकसान पर गौर किया जाना चाहिए। लेकिन यह सही नहीं कि आप उनके विश्लेषण में फैसले लेने का सही समय ही गंवा दें। इससे बचने के जिए डेडलाइन तय करें।एक बार फैसला लेने के बाद आपको उस पर अडिग रहना चाहिए। डेडलाइन के बाद आपको कर्म करना चाहिए और दिखा देना चाहिए कि आपका फैसला सही था। कई बार ऐसा होता है कि समय निकल जाता है और हम  तय ही  नहीं कर पाते कि क्या करना है और क्या नहीं। इसलिए डेडलाइन का भी काफी महत्व होता है।
 

गलत होना भी सही
 अक्सर वे लोग फैसले नहीं ले पाते जो हमेशा ‘सही’ होना जरुरी मानते हैं। सबसे पहले तो यह बात समझ लें कि आप इंसान हैं  और इंसान गलतियों से ही सीखता है। इसलिए हर फैसले में अत्यधिक सावधानी वाली अप्रोच अपनाने से बचें। यह आपको सनकी बना सकती है। जब आप गलती की आशंका स्वीकार करना सीख जाएंगे तब आप उस गलती के कारण पैदा होने वाली स्थिति से निपटने के लिए भी खुद को तैयार कर पाएंगे। इस तरह आप अपने दिमाग को खुल कर सोचने का अवसर देते हैं। दिल और दिमाग को लगातार गलती से बचने की हिदायत दे- देकर आप उसे कही दब्बू ही ना बना बैठंें। ज्यादा सोच - विचार या प्लानिंग करने से आपके जोखिम लेने की क्षमता घटती जाती है। इससे आप सिर्फ घिसे - पिटे ढर्रे पर ही चलते हैं।

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